लुधियाना में TB जांच पर संकट

Punjab media and : महानगर और जिले भर में टीबी जांच के सरकारी दावों को उस समय बड़ा झटका लगा है, जब सिविल अस्पताल सहित करीब 30 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में टीबी जांच करने वाली अत्याधुनिक सीबीनेट (CBNAAT) और टूनेट (Truenat) मशीनें पिछले एक महीने से धूल फांक रही हैं। मशीनों के बंद होने का मुख्य कारण जांच के लिए आवश्यक चिप और कार्ट्रिज (Cartridge) की सरकारी सप्लाई का न आना है। इस तकनीकी किल्लत के चलते जिले के सैकड़ों संदिग्ध मरीजों की समय पर और सटीक जांच नहीं हो पा रही है, जिससे उनके जीवन पर गंभीर जोखिम मंडरा रहा है।

चिप-कार्ट्रिज नदारद, सिविल व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले जैसे हालात
जानकारी के अनुसार, जिला सिविल अस्पताल में सीबीनेट और टूनेट दोनों आधुनिक मशीनें स्थापित हैं, जबकि जिले के अन्य सब-डिवीजनल अस्पतालों, सीएचसी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टूनेट मशीनों के जरिए टीबी की त्वरित जांच की जाती है। पिछले पूरे एक माह से इन मशीनों के संचालन के लिए जरूरी टेस्टिंग किट्स, चिप्स और कार्ट्रिज की आपूर्ति मुख्यालय से नहीं पहुंची है। किट्स की अनुपलब्धता के कारण टीबी जांच केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और अपनी जांच करवाने पहुंच रहे जरूरतमंद मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

माइक्रोस्कोपिक जांच से काम चलाने की मजबूरी, ‘रिफैम्पिसिन प्रतिरोध’ की पहचान असंभव
मशीनें ठप होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने विकल्प के तौर पर नए संदिग्ध मरीजों की जांच पुराने पारंपरिक माइक्रोस्कोपिक (सूक्ष्मदर्शी) तरीके से करने के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रोस्कोपिक जांच से केवल बलगम में टीबी के बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि हो सकती है और सामान्य दवा शुरू की जा सकती है, लेकिन यह तकनीक रिफैम्पिसिन दवा प्रतिरोध की पहचान करने में पूरी तरह असमर्थ है। सीबीनेट और टूनेट जांच की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह चंद घंटों में यह बता देती हैं कि मरीज पर टीबी की मुख्य दवा ‘रिफैम्पिसिन’ असर करेगी या नहीं। यदि ड्रग रेजिस्टेंस मरीज की समय पर पहचान न हो, तो उसे गलत दवाएं मिलती रहती हैं, जिससे बीमारी और अधिक घातक रूप ले लेती है।

पटियाला भेजे जा रहे सैंपल, 5 से 6 दिन का लंबा इंतजार
जिले में सुविधा ठप होने के कारण स्वास्थ्य विभाग अब माइक्रोस्कोपिक जांच में पॉजिटिव आने वाले गंभीर मरीजों के सैंपल आगे की विस्तृत जांच के लिए पटियाला स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज भेज रहा है। पटियाला से सैंपल की जांच रिपोर्ट आने में कम से कम 5 से 6 दिन का लंबा समय लग रहा है। जब तक रिपोर्ट आती है, तब तक मरीजों का सटीक इलाज अधर में लटका रहता है। डॉक्टरों का मानना है कि टीबी जैसी संक्रामक बीमारी में 5-6 दिन की देरी से संक्रमण परिवार और समाज के अन्य लोगों में फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

3 से 4 दिन में सप्लाई बहाल होने की उम्मीद: डॉ. आशीष चावला
मामले की गंभीरता को लेकर जब जिला टीबी अधिकारी डॉ. आशीष चावला से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले एक महीने से राज्य स्तर से कार्ट्रिज और चिप की सप्लाई नहीं आ रही है। डॉ. चावला ने बताया कि विभाग ने व्यवस्था बनाई है कि जिन मरीजों की माइक्रोस्कोपिक जांच पॉजिटिव आ रही है, उन्हें दवाएं देकर प्राथमिक उपचार तुरंत शुरू कर दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्टेट हेडक्वार्टर से आगामी 3 से 4 दिनों के भीतर चिप और कार्ट्रिज की नई खेप लुधियाना पहुंच जाएगी। सप्लाई आते ही सभी मरीजों की दोबारा सीबीनेट और टूनेट जांच की जाएगी, ताकि उनके रिफैम्पिसिन प्रतिरोध की सही स्थिति जानकर उपयुक्त दवाएं तय की जा सकें।

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