Punjab media news : पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधित होने के कारण जहां आम आदमी पहले से पैट्रोल-LPG जैसे रोजमर्रा चीज़ों से जूझ रहा है वहीं अब बीमारियों से लड़ रहे मरीजों को अब बड़ा झटका लगने वाला है। West Asia में जारी तनाव के चलते दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट यानि लागत में भारी उछाल आया है। सरकार के प्रस्ताव के तहत कैंसर की दवाओं, एंटीबायोटिक्स और इंजेक्शन सहित जरूरी दवाओं की कीमतों में लगभग 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि यह कदम फिलहाल short term solution के तौर पर किया जा रहा है, जिसकी अवधि लगभग 3 महीने तक सीमित रखने पर चर्चा हो रही है। सरकार का उद्देश्य है कि दवा इंडस्ट्री को मौजूदा संकट से राहत मिले, लेकिन उपभोक्ताओं पर लंबे समय तक बोझ न पड़े। दवा कंपनियों का कहना है कि इनपुट लागत में तेजी से बढ़ौतरी और मार्जिन पर दबाव के कारण उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उद्योग संगठनों जैसे OPPI और IPA ने सरकार से मूल्य समायोजन की मांग की है, ताकि उत्पादन को बनाए रखा जा सके। हालांकि कुछ उद्योग समूहों ने 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की मांग भी रखी है।
इस संकट का मुख्य कारण खाड़ी देशों से सॉल्वेंट्स की आपूर्ति में बाधा बताया जा रहा है। ये सॉल्वेंट्स दवा निर्माण प्रक्रिया में जरूरी रसायनों को घोलने, शुद्ध करने और प्रोसेस करने में उपयोग होते हैं। ईरान युद्ध के कारण इन रसायनों की आवक कम हो गई है और कीमतें बढ़ गई हैं। कंपनियों का कहना है कि वे अब और अधिक लागत वहन (Absorb) नहीं कर सकतीं। दवा निर्माताओं ने चेतावनी दी है कि यदि कीमतें नहीं बढ़ाई गईं, तो कई दवाओं का उत्पादन आर्थिक रूप से घाटे का सौदा (Unviable) बन जाएगा।
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