भारत समेत कई देशों पर अमेरिका का नया टैरिफ वार

भारत समेत कई देशों पर अमेरिका का नया टैरिफ वार

Punjab media news : अमेरिका ने भारत सहित अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि कई देशों ने कथित जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। इसी आधार पर भारत पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सामने आया है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि जांच के दौरान 54 अर्थव्यवस्थाएं ऐसी पाई गईं, जिन्होंने जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लागू नहीं किया। इस सूची में भारत, चीन, वियतनाम, ताइवान और ब्रिटेन जैसे देश शामिल हैं। भारत के अलावा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे देशों पर भी 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है।

 किन देशों पर 10% टैरिफ?

अमेरिकी जांच में कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय संघ (EU), इंडोनेशिया, इक्वाडोर और पाकिस्तान को ऐसी अर्थव्यवस्थाएं माना गया है जिन्होंने नियम तो बनाए लेकिन उनका प्रभावी पालन नहीं कराया। इन देशों के उत्पादों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।

 अमेरिकी अधिकारी ने क्या कहा?

अमेरिका के शीर्ष व्यापार अधिकारी जेमिसन ग्रीर ने कहा कि कई व्यापारिक साझेदार देशों की नीतियों के कारण अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ देशों ने शुरुआती कदम जरूर उठाए हैं, लेकिन अभी और सख्त कार्रवाई की जरूरत है ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार जबरन मजदूरी को बढ़ावा न दे।

किन उत्पादों को मिलेगी छूट?

प्रस्तावित टैरिफ में कुछ महत्वपूर्ण छूट भी दी गई हैं। इनमें शामिल हैं:

– बीफ (गोमांस)
-कॉफी
-कुछ फल और मेवे
-कुछ विशेष टेक्सटाइल और परिधान उत्पाद
-कनाडा और मैक्सिको से मुक्त व्यापार समझौते के तहत आने वाले कुछ सामान

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने इस प्रस्ताव पर 6 जुलाई तक लिखित सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद 7 जुलाई से सार्वजनिक सुनवाई शुरू होने की संभावना है।अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कई टैरिफ फैसलों को रद्द किए जाने के बाद प्रशासन ने नए व्यापारिक जांच अभियान शुरू किए हैं। इनका उद्देश्य ऐसे शुल्क लागू करना है जो कानूनी रूप से अधिक मजबूत और लंबे समय तक प्रभावी रह सकें।

यदि यह टैरिफ लागू होता है तो अमेरिका को निर्यात करने वाले भारतीय उद्योगों पर अतिरिक्त लागत का दबाव बढ़ सकता है। हालांकि अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है और सार्वजनिक परामर्श तथा सुनवाई के बाद नियमों में बदलाव संभव है।

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