Punjab media news : नगर निगम और बिजली बोर्ड के बीच चल रहे वित्तीय विवाद के बीच अब शहर की स्ट्रीट लाइटों के साथ-साथ निगम के ट्यूबवैल सिस्टम पर भी संकट गहराता दिखाई दे रहा है। नगर निगम कमिश्नर संदीप ऋषि ने स्वीकार किया है कि बिजली बोर्ड ने प्रीपेड मीटर पालिसी की आड़ में शहर के कुछ इलाकों में स्ट्रीट लाइट कनैक्शन डिस्कनैक्ट किए हैं और आने वाले समय में यह प्रक्रिया और तेज हो सकती है।
कमिश्नर ने कहा कि केवल स्ट्रीट लाइट ही नहीं, बल्कि शहर में चल रहे निगम के ट्यूबवैलों पर भी प्रीपेड मीटर लगाने के आदेश हैं। उन्होंने माना कि प्रीपेड सिस्टम में यह प्रावधान होता है कि यदि मीटर में रिचार्ज राशि समाप्त हो जाए तो बिजली सप्लाई अपने आप बंद हो जाती है और कनैक्शन काटने के लिए अलग से किसी कर्मचारी को मौके पर भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ती। ऐसे में यदि भविष्य में किसी ट्यूबवेल के प्रीपेड मीटर में बैलेंस खत्म हो गया तो संबंधित ट्यूबवैल भी तत्काल बंद हो सकता है, जिससे शहर की जल सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है।
कमिश्नर ने यह भी खुलासा किया कि नगर निगम और पावरकॉम के बीच पिछले लगभग तीन वर्षों से कोई नियमित हिसाब-किताब नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड द्वारा उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में जो इलैक्ट्रिसिटी ड्यूटी वसूली जाती है, उसका हिस्सा नगर निगम को मिलना होता है। निगम का दावा है कि बिजली बोर्ड की ओर से करोड़ों रुपए निगम खाते में जमा होने चाहिए, लेकिन दोनों विभागों के बीच खातों का मिलान न होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि किस विभाग को कितनी राशि लेनी है या देनी है।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले को लेकर कमिश्नर ने बिजली बोर्ड के उच्च अधिकारियों से फोन पर बातचीत भी की है और लंबित हिसाब-किताब जल्द से जल्द सैटल करने को कहा है। हालांकि पावरकॉम अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर उनके पास पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है और विस्तृत हिसाब-किताब पटियाला स्थित उच्च कार्यालयों के पास मौजूद है। बताया जा रहा है कि अब नगर निगम की ओर से एक अधिकारी की विशेष ड्यूटी लगाई जा रही है, जो पावरकॉम के साथ बैठकर खातों का मिलान करेगा। इसके बाद शहर में निगम के स्ट्रीट लाइट और ट्यूबवेल कनेक्शनों को चरणबद्ध तरीके से प्रीपेड मीटर प्रणाली में लाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
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