Punjab media news : शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पूर्व MP प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के पार्टी से अलग होने के फैसले के एक दिन बाद, उनके बेटे हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने भी अपने सपोर्टर्स के साथ पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। गुरुवार को पटियाला के गुरुद्वारा श्री दुखनिवारन साहिब में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने सनौर विधानसभा क्षेत्र के पार्टी पदाधिकारियों और वर्कर्स के साथ पार्टी से अलग होने का ऐलान किया।
हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने वर्कर्स की भावनाओं और सुझावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी से अलग होने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि प्रो. चंदूमाजरा की पॉलिटिकल लाइफ पंजाब के संघर्षों और पंथक मुद्दों को समर्पित रही है। स्टूडेंट लाइफ से लेकर अब तक वे पंजाब के हक की लड़ाई में अहम रोल निभाते रहे हैं। उन्होंने इमरजेंसी के दौरान जेल में भी समय बिताया और संसद में पंजाब के मुद्दे पक्के इरादे से उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी लंबे समय से पंजाब सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जो भूमिका निभाने की उम्मीद थी, वह निभाने के लिए कोई असरदार प्रोग्राम नहीं बना पाई है। विरोध अखबारों की रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट तक ही सीमित रहा, जबकि संघर्षों से निकली लीडरशिप से उम्मीद थी कि वह मैदान में लोगों को लीड करेगी।
हरिंदरपाल सिंह ने कहा कि प्रो. चंदूमाजरा ने पंथिक एकता और बिखरी हुई अकाली ताकत को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की अपील की थी, लेकिन इस मुद्दे पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह के जवाब से विचारों और काम करने के तरीके में बड़ा अंतर दिखा। उन्होंने कहा कि जब विचार और काम करने का तरीका मेल नहीं खाता, तो किसी पर बोझ डालने के बजाय अलग होने का फैसला करना बेहतर होता है। उन्होंने कहा कि प्रो. चंदूमाजरा के फैसले के बाद सनौर हलके के वर्करों के बड़ी संख्या में फोन आए। इसके बाद हुई मीटिंग में सभी ने एकमत होकर उनके फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सनौर विधानसभा क्षेत्र के लोगों का चंदूमाजरा परिवार के साथ पुराना राजनीतिक और पारिवारिक रिश्ता रहा है। 1985 में जब प्रो. चंदूमाजरा कम उम्र में विधानसभा पहुंचे थे, तब से लेकर 2017 के चुनाव तक इस विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने उनका साथ दिया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि उनके साथ सनौर विधानसभा क्षेत्र के ब्लॉक समिति सदस्य, राज्य स्तर के पदाधिकारी, जिला नेता, सभी 10 मंडल अध्यक्ष, करीब 450 जिला और राज्य स्तर के डेलीगेट और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य मौजूद थे। उन्होंने कहा कि सभी ने मिलकर शिरोमणि अकाली दल (रिवाइव्ड) से अलग होने का फैसला किया है।
सुखबीर बादल के नेतृत्व वाले अकाली दल में शामिल होने पर अभी कोई फैसला नहीं
सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल में शामिल होने के सवाल पर हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने साफ किया कि इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अगला फैसला वर्करों की राय और भावनाओं को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। इस बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद एक मीटिंग भी होगी। उन्होंने कहा कि फैसला चाहे आज हो या कुछ दिनों बाद, इसका मुख्य आधार पंजाब के हितों और पंथक ताकत को एक प्लेटफॉर्म पर लाना होगा।
बीबी जागीर कौर, गुरप्रताप सिंह वडाला, परमिंदर सिंह ढींढसा और सुच्चा सिंह छोटेपुर समेत दूसरे अकाली नेताओं का ज़िक्र करते हुए हरिंदरपाल सिंह ने कहा कि सभी नेताओं की सोच और काम करने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन पंथक ताकत को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की भावना उन सभी में मौजूद है। उन्होंने कहा कि एकता की इस भावना का सम्मान किया जाना चाहिए और अकाली दल की बिखरी हुई ताकत को मजबूत करने के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि उनका अगला राजनीतिक कदम वर्करों की राय के बाद ही तय किया जाएगा और उनकी प्राथमिकता पंजाब के अधिकारों, हितों और पंथक एकता को मजबूत करना होगी।









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