Punjab media news : सलेम टाबरी इलाके में मारपीट के एक साधारण मामले की गुत्थी सुलझा रही पुलिस के तब होश उड़ गए जब जांच के तार एक बहुत बड़े फर्जीवाड़ा और उगाही रैकेट से जुड़ गए। पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है जो सरकारी विभागों के नकली पहचान पत्र और फर्जी दस्तावेज दिखाकर भोले-भाले लोगों को डराता था और उनसे लाखों की उगाही करता था। इस संगठित रैकेट का शिकार बने एक परिवार के मुखिया ने तो खौफ और मानसिक दबाव में आकर अपनी जीवनलीला समाप्त करने की भी कोशिश की। यह सारा मामला 10 मार्च को अमन नगर निवासी अमन की शिकायत के बाद प्रकाश में आया। अमन ने पुलिस को बताया कि इलाके के ही रहने वाले जगजीत सिंह उर्फ बबलू और राजविंदर सिंह ने उनके परिवार को अपना निशाना बनाया था।
नगर निगम का नकली कर्मचारी बनकर करते थे ठगी
आरोपियों ने अमन की फैक्ट्री के खिलाफ अलग-अलग सरकारी विभागों में झूठी शिकायतें दर्ज करवाईं और फिर फैक्ट्री को पूरी तरह बंद करवाने की धमकी देकर 11 लाख रुपए की मोटी रकम की मांग करने लगे। यह दबाव इतना बढ़ गया कि अमन के पिता विजय कुमार मानसिक रूप से टूट गए और उन्होंने एक सुसाइड नोट लिखकर खुदकुशी की कोशिश की, जिन्हें परिवार ने एन वक्त पर बचाकर अस्पताल पहुँचाया। पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए वो बेहद चौंकाने वाले हैं। आरोपी खुद को बड़े सरकारी अधिकारी बताते थे और लोगों को कानूनी पेचीदगियों में फंसाने का डर दिखाकर मोटी रकम ऐंठते थे। इस गिरोह का एक मुख्य मोहरा संजीव चौहान था जो नगर निगम का नकली कर्मचारी बनकर लोगों को ठगने का काम करता था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जगजीत सिंह की पत्नी पूजा रानी, संजीव चौहान और उसकी पत्नी जतिंदर कौर को भी इस साजिश में नामजद किया है। फिलहाल पुलिस ने आरोपी पूजा रानी को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है, जबकि संजीव चौहान और उसकी पत्नी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
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