Punjab media news पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल संकट) में जारी भारी तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है। दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। आज, 3 अप्रैल 2026 को भी देश में तेल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि इस राहत के पीछे तेल कंपनियों (OMCs) को भारी आर्थिक चोट सहनी पड़ रही है।
वैश्विक संकट और भारत की स्थिति
ब्रेंट क्रूड की कीमतें इस हफ्ते 115 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई थीं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है वहां सप्लाई बाधित होने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी अस्थिरता है। इसके बावजूद भारत सरकार और तेल कंपनियों ने घरेलू कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है ताकि आम जनता को महंगाई का झटका न लगे।
तेल कंपनियों पर आफत: करोड़ों का नुकसान
भले ही आपकी जेब पर बोझ नहीं बढ़ा है लेकिन तेल कंपनियों की हालत पतली हो रही है। सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती के बाद अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा भार अब कंपनियां खुद उठा रही हैं।
पेट्रोल पर घाटा: कंपनियों को हर लीटर पेट्रोल बेचने पर करीब ₹24 का नुकसान हो रहा है।
डीजल पर बड़ा झटका: डीजल की बिक्री पर कंपनियों को प्रति लीटर ₹104 तक का घाटा सहना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां फिलहाल अपने पुराने मुनाफे से इसकी भरपाई कर रही हैं लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहना मुश्किल है।
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