Punjab media news : ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते जहां गैस, तेल और कोयले के दाम बढ़ गए हैं, वहीं अब ईंटों के आसमान छूते दामों के कारण गरीब और मिडिल क्लास परिवारों को अपना घर बनाना मुश्किल हो गया है। ईंटों के दामों में भारी बढ़ोतरी के बारे में जानकारी देते हुए हरमनजीत सिंह, ठेकेदार पप्पी कराली, गुरविंदर सिंह सूरजगढ़, भूपिंदर सिंह, लक्खी शंभू, हरजीत सिंह, सज्जन सिंह, बिल्लू मोही, मनजीत सिंह मोटे माजरा और इलाके के कई अन्य निवासियों ने कहा कि जो ईंट कुछ दिन पहले 5500 से 7000 रुपये प्रति हजार मिल रही थी, वह इस समय 9000 से 9500 रुपये तक मिल रही है।
उन्होंने बताया कि ईंटों के आसमान छूते दामों के कारण ईंटों तैयार होने वाली कोठियां और सरकारी इमारतों के कामकाज भी प्रभावित हो रहा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले ही रेत और बजरी के दाम बढ़े हुए हैं जिस कारण गरीब और मिडिल क्लास परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उक्त इलाके के निवासियों ने कहा कि अगर ईंटों के दाम कम नहीं हुए तो घर बनाने के काम पर बुरा असर पड़ेगा, वहीं काम बंद होने से बेरोजगारी भी बढ़ेगी।
ईंटों के दाम में भारी बढ़ोतरी के बारे में जब भट्ठा मालिकों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कोयला जो पहले 10,500 से 11,500 रुपये प्रति टन मिलता था, वह बीते दिनों जी.एस.टी. 5 से 18 फीसदी करने के बाद अब 20 हजार रूपए प्रति टन पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि कोयले का पैसा जमा करने के बावजूद कई-कई दिनों तक कोयला नहीं मिलता, जिस कारण ईंटों के दाम बढ़ाना मजबूरी बन गया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही कोयले के दाम में कमी आएगी तब ईंटों के दाम भी कम कर दिए जाएंगे।
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