Punjab media news b;आम आदमी पार्टी की सरकार में शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दफ्तरी कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि शिक्षा सचिव द्वारा पिछले 20 सालों से सेवाएं निभा रहे कर्मचारियों की सैलरी पर हर महीने 31,000 रुपये का बड़ा कट लगाने की जिद की जा रही है। सचिव स्कूल शिक्षा द्वारा जारी इन आदेशों के कारण विभाग के करीब 1,000 परिवारों में भारी रोष और निराशा पाई जा रही है, क्योंकि इस महंगाई के दौर में सैलरी में ऐसी कटौती कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक तंगी के कगार पर ला सकती है। गौरतलब है कि सरकार ने कई बार अधिकारियों को सैलरी कम न करने और ठोस फैसला लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन विभाग के अधिकारियों द्वारा इन आदेशों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
जत्थेबंदी की 10 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन शिक्षा सचिव के साथ हुई मीटिंग में कर्मचारियों को 1 अप्रैल 2018 से अध्यापकों की तर्ज पर रेगुलर करने और उनकी सैलरी में कटौती न करने पर सहमति बनी थी, लेकिन पांच महीने बीत जाने के बावजूद यह फाइल अभी भी दफ्तरों के चक्करों में अटकी हुई है। साल 2018 में जब 8,886 शिक्षकों को रेगुलर किया गया था, तब इन दफ्तर कर्मचारियों के साथ भेदभाव हुआ था, जिसके खिलाफ माननीय कोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी और विभाग ने इसे गलती मानकर इसे सुधारने का वादा किया था, जो अभी तक पूरा नहीं किया गया है।सर्व शिक्षा अभियान मिड-डे मील दफ्तर कर्मचारी यूनियन के नेता दीपक नारंग, रणबीर सिंह, पंकज कुमार, गुरप्रीत सिंह और संगीता छाबड़ा ने प्रेस को जानकारी देते हुए ऐलान किया कि 17 फरवरी को सभी दफ्तर कर्मचारी सामूहिक छुट्टी लेकर सरकार के इस फैसले के खिलाफ शिक्षा भवन का घेराव करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो कर्मचारी ‘सीक्रेट एक्शन’ लेने को मजबूर होंगे, जिसके तहत मंत्रियों के घरों के बाहर प्रदर्शन भी किए जा सकते हैं। कर्मचारी नेताओं ने साफ किया कि जब तक सैलरी कटौती के आदेश वापस नहीं लिए जाते और 2018 से रेगुलराइजेशन के आदेश जारी नहीं किए जाते, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
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